चीनी कैसे बनता है?



बहुत लोगों को लगता है कि चीनी घर पर बनाया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं है। चीनी गन्ने के रस से बनता है। गन्ने के रस से तो गुड़ भी बनता है लेकिन गुड़ बनाने की प्रक्रिया आसान है जिसे गांव में कहीं भी बनाया जा सकता है। लेकिन चीनी को सिर्फ चीनी मिल में ही बनाया जा सकता है।

चीनी मिल में ताजा गन्ना पहुंचता है और सबसे पहले गन्ने की अच्छी से सफाई की जाती है। काफी अच्छे से गन्ने की सफाई होने के बाद गन्ने को मशीन के द्वारा छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। अब मशीन के द्वारा गन्ने के छोटे-छोटे टुकड़ों को काफी कस के दबाकर रस निकाला जाता है। उसके बाद गन्ने के रस की अच्छी तरह सफाई की जाती है। अब गन्ने के रस को मशीन में डालकर गर्म किया जाता है। जब गन्ने का रस गर्म रहता है तभी उस रस में कैल्शियम कार्बोनेट और कभी-कभी चारकोल भी डाल दिया जाता है।

गन्ने का रस कैल्शियम कार्बोनेट और चारकोल की वजह से उसमें मौजूद वह सारी चीजें जिसकी वजह से गन्ने का रस भूरे रंग होता है वहां थक्का थक्का बन जाता है और रस को जब काफी तेजी से सेंट्रीफ्यूज में घुमाया जाता है तो वह थक्का बाहर की ओर आ जाता है और उस थक्के को निकाल कर अलग कर लिया जाता है। अलग करने के बाद सिर्फ शुद्ध गन्ने का रस बचा रह जाता है जो पारदर्शी होता है। यह रस को जब सेंट्रीफ्यूज में ठंडा किया जाता है तो वह सफेद क्रिस्टल में बदल जाता है, यही सफेद क्रिस्टल चीनी होता है।

अब आपको यह समझ में आ गया होगा कि चीनी और गुड़ में क्या अंतर होता है। गुड़ में वह सारे पदार्थ मौजूद होते हैं जिसकी वजह से गन्ने का रस गहरा भूरा होता है और चीनी में सारी चीजें कैल्शियम कार्बोनेट और चारकोल की मदद से निकाल दी जाती है और यहां निकालने में काम आता है सेंट्रीफ्यूज। चीनी बनाने की प्रक्रिया में जो चीजें गन्ने के रस से निकाली जाती है उसमें बहुत सारे विटामिन्स और मिनरल्स भी रहते हैं। इसलिए चीनी में विटामिन और मिनरल नहीं के बराबर रहते हैं सिर्फ कार्बोहाइड्रेट ही बचा रहता है।

यह सेंट्रीफ्यूज और केमिकल ही है जो आम लोगों के पास नहीं होता है और जिसके कारण लोग घर में चीनी नहीं बना सकते हैं। चीनी कितना सफेद होगा वह निर्भर करता है कि केमिकल कितना ज्यादा इस्तेमाल किया गया है।

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