गुड़ कैसे बनता है?



गुड़ बनाने की प्रक्रिया काफी आसान है। गुड़ गन्ने के रस से बनता है। खेतों में जब गन्ने की फसल तैयार होती है तो उसे काट लिया जाता है और काटने के बाद गुड़ बनाने की जगह पर ले जाया जाता है।

सबसे पहले गन्ने की अच्छे से सफाई की जाती है। उसके बाद गन्ने को मशीन की मदद से कस के दबाया जाता है जिससे गन्ने का सारा रस निकल के बाहर आ जाता है। गन्ने के रस को बड़े-बड़े ड्रम या बर्तन में भर लिया जाता है। गन्ने से रस निकालने के बाद गन्ने के छिलके को वहीं जमीन पर सूखने के लिए फैला दिया जाता है जो बाद में ईंधन का काम करता है।

उसके बाद जमीन में गड्ढा खोदकर भट्टी बनाई जाती है और फिर उस भट्टी पर बड़े-बड़े आयताकार या चौकोर बर्तन रखकर भट्टी में आग जला दिया जाता है। उसके बाद बर्तन में गन्ने के रस को डालकर उबाला जाता है और धीरे-धीरे रस को घुमाया जाता है। इस प्रक्रिया में गन्ने के रस के ऊपर गंदगी जमा होती रहती है और उस गंदगी को भी समय-समय पर निकाल कर अलग कर लिया जाता है।

समय के साथ रस गाढ़ा होता जाता है और रस का रंग भी धीरे-धीरे भूरा होने लगता है। रस को तब तक पकाया और चलाया जाता है जब तक कि वह सख्त ना हो जाए और थोड़े-थोड़े जलने की खुशबू ना आने लगे। जब रस पूरी तरह पक जाता है तो बर्तन में जो बचता है वह गुड़ होता है। उस गुड़ को एक बड़े सपाट बर्तन में फैला दिया जाता है। फैलाने के बाद गुड़ धीरे-धीरे ठंडा होता है और जैसे-जैसे ठंडा होता जाता है वह जमते जाता है। जब गुड़ जम जाता है तब उसे साइज के अनुसार एक बर्तन में भर लिया जाता है। गुड़ बर्तन में धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है और पूरी तरह ठंडा होने पर उसे बर्तन से निकाल कर पैक कर लिया जाता है और गुड़ बेचने के लिए तैयार हो जाता है।

कई बार गुड़ को टीन में भी रखा जाता है। गुड़ बनाने की प्रक्रिया में सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि गन्ने की अच्छी से सफाई करना और जब गुड़ बन रहा होता है तो रस की अच्छे से सफाई करते रहना, तभी गुड़ शुद्ध बनता है। गुड बनाना एक काफी आसान प्रक्रिया है और गांव में कई जगह पर बनाया जाता है। याद रखें कि गुड़ से कभी भी चीनी नहीं बनता है। चीनी बनाने के लिए गन्ने को ही चीनी मिल में पहुंचाना पड़ता है।

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