खाता और खसरा नंबर क्या होता है जानिए (जमीन का)

आप जब भी जमीन खरीदने या बेचने के बारे में सोचते हैं तो आपको खाता और खसरा नंबर से पल्ला पड़ता है। खाता और खसरा नंबर को समझना काफी आसान है। जिस तरह बैंकों में लोगों का अकाउंट नंबर होता है उसी तरह जमीन के लिए भी लोगों का अकाउंट होता है, हिंदी में इसे खाता या खतौनी कहते हैं। एक गांव में एक आदमी का एक या एक से ज्यादा खाता भी हो सकता है। खाता से यह पता चलता है कि जमीन किसका है। एक खाते का मालिक एक ही होता है या उसका परिवार होता है। जिस तरह बैंक खाता में यह दर्शाया जाता है कि उस आदमी के पास कितन पैसा है उसी तरह जमीन के खाता नंबर से यह पता चलता है कि उस आदमी के पास कौन-कौन सी जमीन है।

अब जानिए कि खसरा नंबर क्या होता है, खसरा नंबर जमीन को दर्शाता है। खसरा नंबर से यह जानकारी मिलती है कि ये किस जमीन के बारे में बात हो रही है, उसका क्षेत्रफल कितना है और उसके चारों बगल किसका-किसका जमीन है।

अगर एक गांव में एक आदमी का एक से ज्यादा जगह प्लॉट है तो सारे प्लॉट का खसरा नंबर अलग-अलग होगा लेकिन सारे प्लॉट का खाता नंबर एक ही हो सकता है अगर उस आदमी का कोई दूसरा खाता ना हो तो। अगर कोई आदमी अपना एक प्लॉट कई हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों को बेच देता है तो उन अलग-अलग हिस्सों का खसरा नंबर अलग-अलग हो जाता है और वह अलग-अलग खसरा नंबर जमीन बिकने के बाद अलग-अलग उस खाता नंबर से जुड़ जाता है जिसको उस आदमी ने जमीन बेचा।

गांव में समय-समय पर सरकार द्वारा सर्वे किया जाता है और उस सर्वे में कौन सा जमीन किसके नाम पर है उसे सरकारी रिकॉर्ड में स्थाई रूप से डाल दिया जाता है इसलिए जमीन खरीदने बेचने के तुरंत बाद सरकारी रिकॉर्ड में जमीन की खरीद बिक्री की जानकारी नहीं भी आ सकती है। सरकारी रिकॉर्ड में आने के लिए नए सर्वे का इंतजार लोगों को करना पड़ सकता है।

इस आर्टिकल का सार यह है कि खाता नंबर से जमीन के मालिक का नाम पता चलता है और खसरा नंबर से किस जमीन के बारे में बात की जा रही है उसका पता चलता है।

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