बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध



आजकल भारत में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा काफी प्रचलित हो गया है। पहले के जमाने में लड़कियों को एक बोझ समझा जाता था, अभी भी कुछ लोग समझते हैं। पहले जब भी घर में बेटी का जन्म होता था तो लोग यह सोच कर परेशान हो जाते थे कि अब उनकी शादी के लिए पैसे जमा करने पड़ेंगे। लोग अपनी बेटियों को दूसरे के घर की अमानत समझते थे। लोग बेटियों को इस कदर बोझ मानते थे कि कन्या भ्रूण हत्या के तौर पर लड़कियों को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता था।

लोगों को हमेशा यह लगता है कि लड़के ही बड़े होकर कमाएंगे और अपने मां-बाप का ख्याल रखेंगे। उन्हें यह लगता है कि लड़कियां तो बड़ी होकर शादी करके ससुराल चली जाएगी। इसी सोच को दूर करने के लिए देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का शुरुआत करना पड़ा।

कई सारी राज्यों में कन्या भ्रूण हत्या इस कदर बढ़ गई थी कि वहां पर लड़कों की तुलना में लड़कियां काफी कम हो गई। इसकी वजह से सामाजिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कई सारे घरों में ऐसा देखा गया है कि लड़कियां कुपोषण का शिकार होती हैं और बीमार होने पर उनका सही से इलाज नहीं होता है और कई सारी लड़कियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। यह काफी भयावह स्थिति है।

अगर इसी तरह लड़कियां कम होती गई तो फिर इंसान को जन्म देने वाली नारी भी नहीं रहेगी और संपूर्ण मानव का विनाश निश्चित हो जाएगा। अगर मानव सभ्यता बचानी है तो यह कन्या भ्रूण हत्या की कुप्रथा को बंद करना जरूरी है। लोगों के दिमाग से यह सोच निकालना जरूरी है कि लड़कियां मां-बाप पर बोझ होती हैं।

ऐसा देखा गया है कि कई सारे लड़के बड़े होकर अच्छी खासी नौकरी पाकर भी अपने मां-बाप का ध्यान नहीं रखते हैं। लेकिन कई सारी लड़कियां अच्छे से पढ़ाई करके काफी अच्छी नौकरी करके अपनी मां-बाप का बहुत अच्छे से ख्याल रखती हैं।

अब जमाना बदल चुका है। अब भारत के किसी भी कोने में कहीं भी चले जाइए महिलाएं हर तरह की नौकरियां, व्यवसाय या किसी भी तरह का काम पुरुषों के साथ बराबरी से कर सकती है। बस जरूरत है तो सिर्फ बेटियों को शिक्षित होने की। अगर लड़कियों को अच्छे से शिक्षित किया जाए तो इसकी शादी के लिए दहेज भी देने की जरूरत नहीं होगी और लड़कियों को अच्छे से अच्छा वर मिल सकेगा। लड़कियां अगर शिक्षित हो तो वह अपने मां-बाप पर बोझ नहीं रहेगी और मां-बाप के बुढ़ापे में लड़कियां भी उनका अच्छे से ख्याल रख पाएगी।

अगर भारत में लड़कियों की कमी से होने वाले सामाजिक अव्यवस्था से बचना है तो लड़कियों की भ्रूण हत्या को रोकना पड़ेगा। लड़कियों की अच्छे से भरण-पोषण करने की जरूरत है और लड़कियों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देकर उसे तरक्की करने का मौका देना पड़ेगा, तभी भारत का असली विकास हो पाएगा।

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