मेला पर निबंध



मेला का इंतजार सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी करते हैं। मेले में परिवार के सारे लोग एक साथ घूमने जाते हैं और घूमने में बड़ा ही मजा आता है। मेले में सारे लोग नए-नए कपड़े पहनकर सज-धज कर जाते हैं। ज्यादातर मेला किसी धार्मिक वजह से लगाई जाती है जैसे दुर्गा पूजा या फिर दशहरा आदि।

मेले में कई दुकान बहुत सजाकर रखते है जो दिखने में काफी अच्छे लगते हैं। मेले की जगमग रोशनी दिखने में बहुत ही अच्छी लगती है। मेले में छोटे बच्चे को तो बहुत ही ज्यादा मजा आता है क्योंकि बच्चों के खेलने के लिए कई सारे स्टॉल लगे रहते हैं। बड़े लोगों के खेलने के लिए भी कई स्टॉल लगे रहते हैं। कुछ लोग तीरंदाजी करते हैं तो कुछ लोग बंदूक से बलून पर निशाना साधते हैं। कई सारे मेले में जादू का शो भी चलता है। कहीं-कहीं मेले में नाटक का मंचन भी होता है। मेले की सबसे खासियत बड़े-बड़े चकरी होते हैं जिसमें बहुत सारे लोग बैठ कर घूमते हैं। मेले में नाव वाले, घोड़े वाले और चकरी वाले झूले लगे होते हैं जिसमें छोटे बच्चे बैठकर काफी आनंद लेते हैं।

मेले में खाने के लिए कई सारे स्टॉल लगे रहते हैं। तरह-तरह के व्यंजन देखकर लोगों के मुंह में पानी आ जाते हैं। यह खाएं कि वह खाएं लोगों के समझ में नहीं आता है। कई सारे स्टॉल पर लोग लंबी-लंबी कतार लगाकर अलग-अलग चीजें खाते हैं। मेले में लोगों को भीड़ देखकर हैरत हो जाती है और इतनी भीड़ देखकर लोगों में उत्साह भी काफी बढ़ जाता है। कपड़े, ज्वेलरी और घरेलू सामन की दुकानों में भी काफी भीड़ होती है जहां ज्यादातर औरतें खरीदारी करती हैं। मेले में ज्यादातर बच्चे गुब्बारे और खिलौना लेकर वापस आते हैं और मेला की यादों को संजो कर रखते हैं और अगले साल मेले का इंतजार फिर से करने लगते हैं।

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